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शिक्षा में अब भी व्यापक सुधार की जरूरत, शिक्षक निखारें बच्चों की प्रतिभा : नीतीश

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किये जाने की बात कही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने बिहार की शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया है, लेकिन अब भी बहुत किया जाना बाकी है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार के लिए चुनौती है, जिसे बहाल करनी है. शिक्षा ऐसी न हो जिससे सिर्फ बच्चों को सिखाया जाये, बल्कि शिक्षा ऐसी हो कि  उनकी प्रतिभा निखर कर सामने आये. 

मुख्यमंत्री शनिवार को शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे. देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर आयोजित शिक्षा दिवस समारोह का आयोजन किया गया. समारोह में पटना साइंस कॉलेज के प्राध्यापक रहे प्रो एचसी वर्मा को मौलाना अबुल कलाम आजाद शिक्षा सम्मान, 2017 से भी सम्मानित किया गया. उन्हें सम्मान स्वरूप शॉल, प्रशस्ति पत्र और 2.50 लाख रुपये का चेक दिया गया. 

चर्चाओं में बने रहने के लिए कुछ लोग करते हैं विरोध

मुख्यमंत्री ने सरकार की पहल और किये कामों का विरोध करने वालों पर भी इशारों-इशारों में हमला किया. उन्होंने कहा कि बिहार म्यूजियम का जब निर्माण शुरू हुआ तो 52 विद्वानों ने इसके खिलाफ बयान दिया. जब भी सरकार कोई पहल करती है या काम करती है तो बहुत लोग तरह-तरह की बात करते हैं. इससे वे घबराते नहीं हैं, सब कुछ झेलते हैं.  किसी भी क्षेत्र में काम हो ऐसे लोगों की प्रवृत्ति होती है कि वे चर्चा में बने रहने के लिए वे उसका विरोध करते हैं. उनका उससे कोई लेना-देना नहीं होता है. ऐसी प्रवृत्ति उनकी नहीं है. वे चाहते हैं कि बुनियादी तौर पर इस तरह का परिवर्तन हो जाये कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल हो. 

जिस स्थिति में गंगा है वह आने वाली पीढ़ी के साथ है अन्याय 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का दुष्परिणाम सामने आ रहा है. यह पूरे दुनिया भर का चक्कर है. दिल्ली से लेकर बीजिंग में यही स्थिति है. मनुष्य भ्रम में है कि वह प्रकृति पर काबू पा लेगा. लोगों का मन लालची होते जा रहा है, जो प्रकृति के खिलाफ है. पृथ्वी के साथ छेड़छाड़ आत्मघाती कदम है. पहले गंगा की अविरलता और निर्मलता दोनों थी, लेकिन अब दोनों का अभाव है. बचपन में हर दिन गंगा में स्नान करते थे और पानी के लिए बाल्टी में पानी भी लाते थे, लेकिन अब गंगा का पानी पीने लायक भी नहीं है. पिछले 50 सालों में गंगा को इस स्थिति में पहुंचा दिया कि वह आने वाली पीढ़ी के साथ अन्याय है.

प्राकृतिक शिक्षा का मॉडल स्थापित करने की अपील

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रो एचसी वर्मा से बिहार में भी कानपुर की तर्ज पर प्राकृतिक शिक्षा का मॉडल स्थापित करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आपका बिहार और साइंस कॉलेज से नाता है. बिहार में भी एक मॉडल स्थापित करें, ताकि बच्चों को प्राकृतिक और स्वाभाविक तौर पर शिक्षा मिल सके. इससे बच्चों के अंदर की प्रतिभा निकल कर सामने आयेगी. इसमें राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी. बच्चों में इतिहास, प्रकृति व पर्यावरण सब चीजों की जानकारी, जागृति व जागरूकता होनी चाहिए. व्यवहार वैसा होना चाहिए. इस पृष्ठभूमि के साथ शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाना चाहिए. हर किसी के अंदर जो प्रतिभा है, निखरना चाहिए. 

बिहार में शिक्षा की जो भी स्थिति हो, लेकिन देश में किसी भी संस्थान में नामांकन हो या फिर किसी नौकरी में सबसे ज्यादा बिहार के युवा शामिल होते हैं और   सफलता प्राप्त करते हैं. हमें अपने युवाओं की प्रतिभा पर पूरा भरोसा है. हमें विश्वास है कि नये ढंग से शिक्षा का विकास होने पर हमारे युवा और भी मेधावी होकर उभरेंगे और बिहार फिर से अपने ज्ञान की भूमि को प्राप्त करेगा. उन्होंने कहा कि बिहार में लड़कियों की शिक्षा में बहुत काम किये गये हैं. पोशाक योजना का असर ऐसा है कि मिडिल स्कूलों में छात्रों से ज्यादा छात्राओं की संख्या है, जबकि साइकिल योजना की जब शुरुआत हुई थी तो नौंवी में 1.70 लाख  छात्राएं थी, जो बढ़ कर अब नौ लाख के पार हो गयी है. मुख्यमंत्री ने चंपारण शताब्दी वर्ष पर पर किये कामों की विस्तार से  चर्चा की और 20 नवंबर को भितिहरवा में होने वाले कार्यक्रम की जानकारी दी. 

समारोह में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन, सचिव आरएल चोंगथू, अपर सचिव मनोज कुमार, पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर, बिहार शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक संजय सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष वर्मा, माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजीव प्रसाद सिंह रंजन, प्राथमिक शिक्षा निदेशक एम रामचंद्रूडू समेत शिक्षा विभाग के पदाधिकारी और पटना जिले के स्कूली बच्चे शामिल हुए. समारोह के बाद बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया.